GOD KRISHNA SAVE BHEEM’S LIFE STORY IN HINDI.

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महाभारत में यदि कृष्ण ने भीम को ये बताया नहीं होती तो, भीम कब का मर चुका होता ।

GOD KRISHNA STORY IN HINDI.

MAHABHARAT KRIHSNA STORY IN HINDI

GOD KRISHNA STORY IN HINDI.

जब महाभारत के समय एक एक करके कोरवों की मृत्यु हो रही थी । तभी भीम को अहंकार आ जाता है और वह श्री कृष्ण को कहते है । पांडवो के सामने कोरवों का औचतय नहीं है ।

जब यह अहंकार भीम की आँखों में दिखा तब श्री कृष्ण ने कहानी के माध्यम से भीम को महातपूर्ण बात को बतलाया । जो इस संसार में सभी लोगो को याद रखना चाहिए ।

एक गाँव में एक मूर्तिकार रहता था । उस मूर्तिकार में एकै विशेष बात छिपी हुई थी की उस मूर्तिकार जो भी मूर्ति बनाया करता था उसमे एक अलग सी कशिश थी । अगर उसके आगे किसी इंसान की तस्वीर रख देते थे तब भी वह एक ऐसी मूर्ति को बना पाता थी जैसे वो उस इंसान की वास्तविक प्रतिमा दिखती हो ।

MAHABHARAT KRIHSNA STORY IN HINDI.

अब धीरे धीरे उस मूर्तिकार का हुनर आस-पास के गांवो में ज्ञात होने लगा । आस -पास के राज्यो से उसके पास कई लोग आकार मूर्तिया बनवाने को कहते है । अब धीरे-धीरे मूर्तिकार पास के सभी राज्यो में प्रसिद्ध हो गया । अब उस जैसा मूर्तिकार ढूंढ पाना काफी मुसकिल हो चुका था । अब ऐसा लगा रहा था की मूर्तिकार की अपने आप में एक प्रतिमा बन चुकी थी ।

पास के बड़े राजा को जैसे ही ये प्रतिभावांन मूर्तिकार की कला के बारे में पता चलता है । तब वह तुरंत अपने सैनिको को बोल कर मूर्तिकार को अपने राज्य में पेश करने का आदेश देते है ।

शहर के राजा के द्वारा बुलाये जाने पर मूर्तिकार काफी खुश हो जाता है वो उन सैनिको के साथ जाने को राजी हो जाता है । अब राजी पहुचने पर राजा उसे अपने हुनर का इस्तेमाल करने को बोलते है । मूर्तिकार अपने कला का प्रदर्शन करते हुये राजा की मूर्ति उनके जैसी हूबहू बना देता है । उस मूर्ति को देखकर सब दंग रह गए आखिरकार पहचान करना वाकाय में मुसकील हो गया ।

राजा उस मूर्तिकार की क्लाकारिया देखकर खुश होकर उसे इनाम और एक बड़ा सा घर भेट देते है | अब वो मूर्तिकार शहर में काफी उचे दर्जे का माना जाने लगा | अब उसके मन में अहंकार ने जन्म ले लिया था जिसे मिटाना इतना आसान नहीं था |

अब एक दिन मूर्तिकार अपने बिस्तर पर सो रहा था और अचानक उसके पास एक पत्र उड़कर आता है। जिसमे लिखा था की आज जाता उसके घर पर जेवरात और हीरे भिजवाएंगे । मूर्तिकार उस पत्र को पढ़कर फेक देता है उसे लगता है उसके साथ किसी ने मज़ाक की है । और थोड़ी ही देर में उसे राजा के द्वारा जेवरात और हीरे मिलने की खुशी मिलती है ।

कुछ समय बाद उसे फिर से एक पत्र मिलता है । जिसमे लिखा होता है की शहर के बहुत से लोग उसकी बनाई मूर्तियो को एक साथ खरीदेंगे । उसे शुरुआत में मज़ाक लगता है लेकिन पिछली बार के किस्से को लेकर वो हकीकत सोच रहा था । और देखते ही देखते अचानक उसके पास कई लोगो का एक साथ झुंड मूर्तियो को खरीदने आ जाते है ।

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उसके बाद मूर्तिकार को कई बार पत्र मिले जिसमे लिखी हुई साथ छीजे वास्तविक थी । मूर्तिकार समझ गया की ये कोई मज़ाक नहीं है ये अधभूत पत्र है जो भविष्य बया करता है । और एक दिन अचानक मूर्तिकार के पास हमेशा की तरह पत्र उड़कर आता है । जिसमे लिखा था की कुछ ही देर में यमराज धरती पर आकार उसकी आत्मा को अपने साथ ले जाने वाले है । क्योंकि उसका समय अब धरती पर खत्म हो चुका है ।

मूर्तिकार अब पूरी तरीके से घबराहट में था और उपर से वो अहंकारी इंसान भी जो अपने असुलो से दुनिया में ज़ीना पसंद करता था । वो अपनी अक्लमंदी से सोच कर अपने जैसी कई मूर्तिया बना लेता है जो हुब हु उसके जैसी दिखती है । अब पहचान पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था । और कुछ ही देर में यमराज वहाँ पर पाहुचते है , जिसमे यमराज उस मूर्तिकार को ढूंढ नहीं पाये की असली मूलतिकार इन मे से है कौन ?

यमराज अपनी जोश भरी आवाज के साथ कहते है ” अगर आज मूर्तिकार मुझे मिल जाता तो खुद ईश्वर उसकी कला को देखना चाहते है । लेकिन सायद आज ये संभव नहीं हो सकता” जैसी ही मूर्तिकार को ये बात पता चलती है । वो तुरंत उन मूर्तियो से बाहर आकार यमराज के पास आकार बोलता है । मैं ही हूँ वो महान मूर्तिकार । जिसकी तुम्हें तलाश है |

यमराज जैसी ही उस मूर्तिकार को देखते है वे तुरंत उसकी आत्मा को लेकर इस संसार से चले जाते है और मूर्तिकार को नसीब में मौत मिलती है ।

इस कहानी के द्वारा कृष , महारथी भीम को यही कहना छाह रहे थे की “अहंकार इंसान को खा जाता है”

KRISHNA BHAGWAN STORY

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